बालाघाट। कोरोना को लेकर घबराहट की स्थिति एक महिला की मौत की हो गई। बालाघाट जिला चिकित्सालय में गर्भवती महिलाओं की जांच में हो रही लापरवाही का यह एक जीवंत प्रमाण है, लेकिन हर बार की तरह इस बार भी चिकित्सक ने महिला में बीमारी को मौत की वजह बताया।
शहर के एक निजी क्लिनिक में महिला चिकित्सक को दिखाने के बाद महिला को ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया था। जहां महिला का पूरा चेकअप हुआ। बाद में उसके पति के हैदराबाद से आने की सूचना मिलने पर उसे कोविड सेंटर में रखा गया था। यहाँ प्रसुता महिला का ईलाज जारी था, किन्तु महिला को सांस की समस्या होने के कारण उसकी मौत हो गई। महिला के ईलाज में किसी प्रकार से कोई कमी नहीं की गई। कोरोना के भ्रम में गर्भवती महिला की जान गयी, बेवजह कोविड सेंटर में भर्ती किया गया – डॉ. आर.के. मिश्र, सिविल सर्जन
प्राप्त जानकारी के अनुसार लांजी निवासी 6 माह की गर्भवती महिला की तबियत बिगड़ने पर उपचार के लिए परिजन उसे शहर के एक निजी अस्पताल में ले गए, डॉक्टर की सलाह पर उसे ट्रामा सेंटर ले जाया गया। यहां महिला का इलाज शुरू होने के बाद जब महिला के समबंध में स्वास्थ्य प्रबंधन को जानकारी मिली, तो प्रबंधन ने महिला को ट्रामा सेंटर के पास ही बनाये गये कोविड सेंटर में भर्ती करवा दिया। कोविड सेंटर में कुछ समय के बाद महिला की मृत्यु हो गई। महिला का पति हॉट स्पॉट सेंटर हैदराबाद से घर आया था, यह जानकारी मिलने के बाद बिना पूरी जाँच पड़ताल किए महिला को ट्रामा सेंटर से कोविड सेंटर में भेज दिया गया। जहाँ प्रसुता महिला की कोविड सेंटर में मौत हो गई। इस घटना का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि, अस्पताल प्रबंधन महिला को कोरोना मरीज नहीं मान रहा है। बावजूद इसके, शव को कोरोना पॉज़िटिव प्रोटोकॉल के तहत कोविड सेंटर बाहर किया गया गया। अस्पताल की मानवीय संवेदनशीलता पर भी प्रश्नचिन्ह लग गया है। सिविल सर्जन डॉ. आर.के. मिश्रा के अनुसार महिला को सांस लेने में तकलीफ़ थी और पेशाब भी रूक रहा था। डॉक्टर मिश्र का कहना है कि सांस की बीमारी के कारण महिला की मौत हुई है।
सरस्वती पति नंदकिशोर कछवाहे उम्र ३० वर्ष को लगभग 6 माह का गर्भ था। जिसका पति गत 5/6 मई को हेदराबाद (corona hot spot) से अपने घर आया था। पति को होम क्वारेंटाईन किया गया था। इस दौरान गर्भवती पत्नी की तबियत बिगड़ने से परिजन बालाघाट के निजी क्लिनिक में महिला चिकित्सक के पास इलाज के लिए लेगाये थे। प्राथमिक जांच के बाद चिकित्सक ने महिला को शासकीय अस्पताल लेजाने की सलाह दी। परिजन उसे लेकर ट्रामा सेंटर पहुंचे, यहाँ महिला को भर्ती कर के उपचार प्रारम्भ किया, लेकिन कुछ ही देर बाद पति के हेदराबाद कोरोना हॉट स्पॉट से आने की जानकारी मिलने पर स्वास्थ्य प्रबंधन ने महिला को तत्काल ट्रामा सेंटर से कोविड सेंटर में भेज दिया, जहां पर शाम को महिला की मौत हो गई।
यहाँ यह उल्लेखनीय है कि, महिला का पति 5/6 मई को हेदराबाद से आया था। कोरोना के लक्षण प्रारम्भ में ही दिखाई देते है और अगर शुरूआत में नहीं भी दिखते है तो प्रोटोकाल के तहत 14 दिनों में नजर आने लगते है। लेकिन मृतका के पति में ऐसे कोई लक्षण नहीं थे वह स्वस्थ्य था और होम क्वारेंटाईन का पालन भी किया था। जिसकी पूरी जानकारी लिए बिना ही महिला को ट्रामा सेंटर से कोविड सेंटर में भर्ती कराने और यहां प्रसुता महिला की मौत के बाद अब महिला में ही बीमारी होने का सहारा लिया जा रहा है। प्रथमदृष्टा यह मामला कोविड-19 की घबराहट भय और भ्रम की स्थिति के साथ ही लापरवाही का मामला दिखाई देरहा है। इस मामले में यदि जिम्मेदारी तय कर के कार्यवाही नहीं की गई, तो इस प्रकार की लापरवाही भविष्य में किसी अन्य गंभीर बीमारी के मरीज़ की मौत का सबब बनने की सम्भावना से इंकार नही किया जा सकता।
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